आरोग्य-प्रकाश
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आरोग्य-प्रकाशसफेद कोढ़

सफेद कोढ़

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शरीर के ऊपर जो सफेद-सफेद दाग हो जाते हैं वे कोढ़ नहीं हैं, चर्मरोग मात्र ही है। फिर भी लोग इसे कोढ़ के नाम से ही पुकारते हैं। इसमें छुआछूत के रोग होने का डर नहीं है। यह रोग किस कारण से पैदा होता है इसका निश्चय अभी तक नहीं हुआ है।

चिकित्सा

इस रोग की बाकुची (बड़ा दाने वाली बाबची, तुखमलंगा नहीं) बहुत अच्छी दवा है। बाकुची का चूर्ण ३ से ६ ग्राम तक जल के साथ सेवन किया जाय और गोमूत्र में पीसकर लगाया जाय तो शीघ्र ही रोग अच्छा हो जाता है। यह दवा खाने से गर्मी करती है एवं लगाने से छोटी-छोटी फुंसियाँ हो जाती हैं। किन्तु इसमें भय की कोई बात नहीं है। गर्मी तो स्वतः शान्त हो जाती है और छोटी-छोटी फुंसियाँ हुए बिना चमड़े का रंग ही नहीं बदलता। मरिचादि तैल की मालिश भी लाभदायक है। जलने के कारण उत्पन्न हुए सफेद दाग प्रायः अच्छे नहीं होते।

पथ्यापथ्य

खाज-खुजली के रोगी के लिए ठंडे जल में स्नान करना बहुत लाभकारी है। पीड़ित स्थान को त्रिफला, नीम का काढ़ा या कार्बोलिक साबुन से धो लेने के बाद दवा लगाना बहुत फायदेमंद है। नारियल के तेल में कपूर मिलाकर मालिश करने से भी खाज-खुजली में फायदा होता है। बिना नमक डाले चने की रोटी बहुत लाभ पहुँचाती है। यदि चने की रोटी का निरन्तर सेवन किया जाय तो बिना किसी दवा के भी रोग अच्छा हो सकता है। खुजली के रोगी के लिए दूध या दही का सेवन हानिकारक है; क्योंकि दूध या दही से शरीर में अधिक रस तैयार होता है और इससे बहुत खाज होती है। इसमें ताजा घी खाना बहुत उत्तम है। शहद खाना भी लाभदायक है। नमक, तेल, गुड़, खट्टा, मिर्चा आदि खाना निषेध है। पेट साफ रखना चाहिए, क्योंकि कब्जियत से बीमारी बढ़ती है।