आरोग्य-प्रकाशदद्रु (दाद-दिनाय)

दद्रु (दाद-दिनाय)

1 मिनट का पाठ

यह चर्मरोग मात्र है। इसमें दवा खाने की आवश्यकता नहीं है। सिर्फ लगाने की दवा से ही लाभ हो जाता है। साबुन से अच्छी तरह स्नान करना, तैल लगाना, भीगे वस्त्रों को न पहनना आदि बातों में सावधानी रखकर इस रोग से बचा जा सकता है। टट्टी की बदबू के कारण भी दाद हो जाती है।

चिकित्सा

(१) चक्रमर्द (चकवड़) के बीज को महीन पीसकर लगाने से दाद तथा एक्जीमा में लाभ होता है।

(२) सुहागे का लावा, राल, गन्धक और पारसी अजवायन—इन ४ चीजों को जल के साथ महीन पीसकर लगाने से दाद आराम हो जाती है।

(३) पारा और गन्धक की कज्जली करके दोनों के बराबर सुहागे का लावा मिला दें। इसे घी या तैल में मिलाकर लगाने से दाद, खाज, फोड़ा-फुंसी, घाव आदि शर्तिया अच्छे होंगे।

(४) इमली के बीज को नीबू के रस में पीसकर लगाने से दाद में आराम हो जाता है।