आरोग्य-प्रकाशऔषधियों के रोगानुसार अनुपान

औषधियों के रोगानुसार अनुपान

6 मिनट का पाठ

दवा जिस पदार्थ के साथ खाई जाती है, उसे अनुपान कहते हैं। रोग को दूर करने वाले अनुपान के साथ सेवन करने से औषधि की शक्ति बढ़ जाती है। जहाँ किसी औषधि का अनुपान न लिखा हो, वहाँ रोग के अनुसार नीचे दिए गए अनुपान के साथ सेवन किया जा सकता है।

सामान्य ज्वर में

अदरक का रस, तुलसी के पत्तों का रस, शहद, तुलसी के पत्तों का फाण्ट, गरम जल आदि।

वात ज्वर में

शहद, गिलोय का रस, दशमूल क्वाथ, चिरायता का हिम कषाय, लौंग का पानी आदि।

पित्त ज्वर में

पटोलपत्र का रस, पित्त पापड़ा का स्वरस या क्वाथ, ह्रीबेरादिक्वाथ, मुस्तादि क्वाथ।

कफ ज्वर में

[प्रथम द्रव्य का नाम OCR में अस्पष्ट] का रस, अदरक का रस, तुलसी के पत्तों का रस, शहद।

सन्निपात ज्वर में

अदरक का रस, तुलसी पत्र रस, सहजन की छाल का रस या काढ़ा, एरण्डमूल क्वाथ, दशमूल क्वाथ, तगरादि क्वाथ, शहद।

विषम ज्वर में

पिप्पली चूर्ण और मधु, हारसिंगार के पत्तों का रस, बिल्व-पत्र रस, गरम जल।

जीर्ण ज्वर में

मधु, पिप्पली चूर्ण, सितोपलादि चूर्ण, भुने जीरे का चूर्ण और गुड़, गिलोय सत्त्व, महासुदर्शन चूर्ण का फाण्ट, महासुदर्शन अर्क, धारोष्ण दूध, गरम करके ठण्डा किया हुआ दूध, मक्खन और मिश्री आदि।

अतिसार और संग्रहणी में

छाछ, तण्डुलोदक (चावल का धोवन), कुड़े की छाल का काढ़ा, धान्य पंचक क्वाथ, बेलगिरी का क्वाथ, भुने जीरे का चूर्ण।

प्रवाहिका (पेचिस) व रक्तातिसार में

छाछ, वत्सकादि क्वाथ, कुड़े की छाल का क्वाथ, बेल का मुरब्बा, ईसबगोल बीज का हिम कषाय या लुआब, सौंफ का चूर्ण या सौंफ का अर्क, कुटजावलेह।

खूनी बवासीर में

नागकेसर असली का चूर्ण, काले तिल का कल्क मक्खन और मिश्री मिलाकर, आँवले का मुरब्बा, आयापान का रस, गेंदा (गुल हजारा) के पत्तों का रस।

रक्त पित्त में

अडूसे के पत्तों का रस, दूब का रस, अनार के पत्तों का रस, गुड़हल के पत्तों का रस, आँवले का रस, कुष्माण्ड रस, धनिया का हिम, आँवला मुरब्बा, गुलकन्द।

अग्निमान्द्य में

अदरक का रस, नीबू का रस, खट्टे अनार का रस, अजवायन का अर्क, शहद।

अजीर्ण और पेट-दर्द में

गरम पानी, काँजी, भुनी हींग का चूर्ण और सेंधा नमक मिली छाछ, जामुन का सिरका, पोदीना की पत्ती का रस या अर्क-पोदीना की दस बूँदें मिलाया हुआ जल, महाशंखद्राव की सात बूँदें मिलाया हुआ जल, अजवायन अर्क।

विसूचिका में

प्याज का रस, अदरक का रस, लाल मिर्च का पानी, पोदीना की पत्ती का रस, अर्क पोदीना या अर्क कपूर दस बूँदें मिलाया हुआ जल।

भस्मक (बहुत अधिक भूख लगना) में

पके केले का गूदा ५८·३२ ग्राम, घी, अपामार्ग के बीजों की खीर, भैंस का दूध।

कृमिरोग (पेट के कीड़े) में

वायविडंग का चूर्ण, पलाशपापड़ा चूर्ण, निर्गुण्डी रस, अनार की जड़ का क्वाथ, अनन्नास के पत्तों का रस।

पाण्डु व कामला में

त्रिफला चूर्ण, कुटकी चूर्ण, मधु, मिश्री, आँवलारस, गन्ने का रस, मौसम्मी का रस, गौमूत्र, त्रिफला क्वाथ, वेदाना, अनार का रस, आँवला मुरब्बा।

क्षय (यक्ष्मा) में

मक्खन, मिश्री, शहद, अडूसे के पत्ते का रस, छोटी कटेरी का रस, तुलसी के पत्तों का रस, पान का रस, गिलोय सत्त्व, चौंसठ प्रहरी पीपल, सितोपलादि चूर्ण, मुलैठी घनसत्त्व, शर्बत उन्नाव, शर्बत गुलवनफसा, च्यवनप्राश।

कफ वाली खाँसी व दमा में

अदरक का रस, पान का रस, छोटी कटेरी का रस, शहद, छोटी पीपल का चूर्ण, काकड़ासिंगी चूर्ण, त्रिकटु चूर्ण।

सूखी खाँसी में

अडूसे के पत्तों का रस, शहद, मिश्री, मलाई, कण्टकार्यवलेह, वासावलेह, अपामार्गक्षार, मुलैठी घनसत्त्व।

कुकुरकास (काली खाँसी) में

केले का गूदा, मलाई, खोवा, लहसुन कल्क, घी, मिश्री, वासावलेह आदि।

हिचकी रोग में

मोर पंख की भस्म, पिप्पली चूर्ण, बेर की गुठलियों की मींगी, छोटी इलायची बीज चूर्ण, शहद।

दमा व श्वास में

अदरक रस, पके पान का रस, तुलसी का रस, शहद, अडूसे का रस, कटेरी का रस, भारंगीमूल क्वाथ, कूठ चूर्ण, काकड़ासिंगी चूर्ण, तालिसादि चूर्ण, भार्गी गुड़, अगस्त्य हरीतक्यवलेह, च्यवनप्राश, द्राक्षारिष्ट, मृतसंजीवनी सुरा।

अरुचि में

अदरक रस, बिजोरा नीबू रस, खट्टे अनार का रस, दाडिमाष्टक चूर्ण, यवानीखाण्डव चूर्ण।

स्वर भेद में

मुलैठी व दाखों का काढ़ा, तुलसी के पत्ते व काली मिर्च का काढ़ा मिश्री मिलाकर, कुलिंजन का काढ़ा, कुलिंजन व मिश्री का चूर्ण।

वमन में

पीपल वृक्ष के छिलकों के अंगारों का बुझा हुआ पानी, बड़ी इलायची का चूर्ण या काढ़ा।

भ्रम (चक्कर आने में)

ब्राह्मी का रस, शंखपुष्पी रस, आँवले का मुरब्बा, गुलकन्द, वेदाना, अनार का रस, ब्राह्मी शर्बत, चन्द्रावलेह।

दाह (जलन) में

दाडिमावलेह, आँवले का मुरब्बा, गुलकन्द, अनार शर्बत, मौसम्मी रस, वेदाना, अनार का रस, दूध की लस्सी, नीबू की शिकंजी, धनिया का हिम, सफेद चन्दन घिसकर मिलाया हुआ जल, खस डाला हुआ मिट्टी के घड़े का ठण्डा पानी।

अपस्मार व उन्माद में

ब्राह्मी रस, शंखपुष्पी रस, ब्राह्मी अर्क, मांस्यादि क्वाथ, महाचेतस घृत, चन्द्रावलेह और पुराना घी।

वात रोगों में

रास्नासप्तक क्वाथ, महारास्नादि क्वाथ, दशमूल क्वाथ, एरण्ड तेल, घी।

मूत्रकृच्छ्र या मूत्राघात में

गोक्षुरादि क्वाथ, वरुण की छाल का काढ़ा, पंच-तृणमूल क्वाथ।

प्रमेह में

हल्दी स्वरस, त्रिफला क्वाथ, सारिवादि हिम, शहद।

बहुमूत्र में

पका केला, जामुन की छाल का काढ़ा, पुराना शहद, दूध, घी।

मधुमेह में

बेलपत्र का रस, जामुन की छाल का काढ़ा, जामुन की मींगी का चूर्ण।

शोथ में

पुनर्नवा रस, पुनर्नवाष्टक क्वाथ, गोमूत्र, सूखी मूली का काढ़ा, मकोय का रस या अर्क मकोय।

गुल्म, उदर, तिल्ली और यकृत् के रोगों में

गोमूत्र, त्रिफला क्वाथ, पुनर्नवादि क्वाथ, विडंगासव, कुमारी आसव, लोहासव।

गलगण्ड, ग्रन्थि, अर्बुद और विद्रधि आदि में

त्रिफला क्वाथ, काञ्चनार की छाल का काढ़ा, विडंगासव।

उष्णवात (सुजाक) में

गिलोय का रस, हल्दी का रस, सेमल की छाल का क्वाथ, दारुहल्दी क्वाथ, चन्दनादि अर्क, दूध की लस्सी।

उपदंश (आतशक) में

चोपचीनी का काढ़ा, दूध, घी, मिश्री, अर्क उस्वा, जल।

विसर्प व कुष्ठ में

नीम की अन्तर्छाल का काढ़ा, महामंजिष्ठादि क्वाथ, महामंजिष्ठादि अर्क, गिलोय का रस, खदिरकाष्ठसार का काढ़ा, पंचतिक्त घृत, बाकुची चूर्ण, खदिरारिष्ट।

शीतपित्त में

नीम के पत्तों का रस, हल्दी का चूर्ण, मिश्री, घी, सारिवाद्यरिष्ट।

अम्लपित्त में

बेदाना अनार का रस, कुम्हड़े का रस, आँवले का रस, आँवला मुरब्बा, डाभ (कच्चा नारियल) का पानी, दाड़िमावलेह, मौसम्मी का रस।

नेत्र रोग में

त्रिफला क्वाथ, महात्रिफलाघृत, घी, मिश्री, गुड़।

सिर दर्द में

पथ्यादि क्वाथ, गुड़, घी, मिश्री, गरम दूध।

रक्त प्रदर में

लाल चौलाई का रस, अशोक छाल का काढ़ा, अशोक घनसत्त्व, दारुहल्दी का काढ़ा, अडूसा पत्र रस, चावलों का धोवन, अशोकारिष्ट, अशोकघृत, गाय या बकरी का धारोष्ण दूध।

श्वेत प्रदर में

त्रिफला क्वाथ, पका केला, राल चूर्ण, सफेद जीरे का चूर्ण या काढ़ा, सारिवाद्यरिष्ट।

हृद्रोग में

अर्जुन की छाल का रस या काढ़ा, अर्जुन की छाल के साथ सिद्ध किया हुआ दूध, अर्जुनघृत, अर्जुनारिष्ट, खमीरा गाजबान।

अनुपान की मात्रा और चयन

रोग और रोगी की स्थिति पर विचार करते हुए अनुपान का निश्चय करना चाहिए।

  • क्वाथ, फाण्ट और हिम — २९ ग्राम से ५८.३२ ग्राम तक।
  • वनस्पतियों के रस (स्वरस) — ११.६६ ग्राम से २३.२ ग्राम तक।
  • घी, मक्खन, मधु (शहद), मलाई और अवलेह — इतने लें कि औषधि की मात्रा (खुराक) अच्छी तरह मिलाकर चाटी जा सके।
  • काँजी, तक्र और दूध आदि — ५८.३२ ग्राम से ११६.६४ ग्राम तक।
  • आसव-अरिष्ट — २३.२ ग्राम से ४६.४ ग्राम तक।
  • औषधि-चूर्ण अनुपान में हो तो १ से ३ ग्राम लेकर शहद में मिलाकर चाटें, अथवा दवा खाकर आवश्यकतानुसार जल पी लें।