आरोग्य-प्रकाशसिरदर्द

सिरदर्द

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सिरदर्द अन्यान्य बीमारियों का लक्षण मात्र है। तब भी वैद्यकशास्त्र में इसके लिए ऐसी उत्तम दवाइयाँ लिखी गई हैं कि उनके सेवन करने से सिरदर्द तो आराम हो ही जाता है, साथ ही मूल रोग की चिकित्सा भी उन्हीं दवाइयों से हो जाती है। जुकाम, अधिक परिश्रम, मानसिक चिन्ता, रात्रि जागरण, रक्त-संचय आदि से जो सिरदर्द होता है वह अपने-आप चला जाता है। परन्तु जो लोग निरन्तर सिरदर्द के कारण कष्ट भोगते हैं, उनके लिए दवा का सेवन आवश्यक हो जाता है। निरन्तर सिरदर्द के विशेष कारणों में अम्लपित्त देखा जाता है तथा आँख का काला मोतियाबिन्द भी देखा गया है।

चिकित्सा

सर्दी, जुकाम, परिश्रम आदि मामूली कारणों से उत्पन्न होने वाले सिरदर्द में गोदन्ती हरिताल भस्म १ ग्राम चीनी के साथ या ताजा घी के साथ लेने से बहुत शीघ्र लाभ होता है। बाजार में एस्पिरिन-घटित दवाएँ सिरदर्द के लिए बिकती हैं। इनसे सिरदर्द तो तत्काल शान्त हो जाता है, लेकिन हृदय पर बुरा प्रभाव डालती हैं। इन दवाओं के बराबर खाने से दिल कमजोर हो जाता है। दालचीनी को जल के साथ पीसकर लेप करने से सिरदर्द आराम होता है। जुकाम के कारण होनेवाले सिरदर्द में दोनों पैरों को गर्म पानी में रखने से या जरा-सा कायफल-चूर्ण अथवा यूकेलिप्टस ऑयल के सूँघने से आराम होता है। गर्मी के कारण होनेवाले सिरदर्द में सिर में नारायण तेल की मालिश लाभकारी है या सिर के बाल मुँडाकर सौ बार धोए हुए घी की मालिश करें। शारीरिक और मानसिक परिश्रम के कारण होनेवाले सिरदर्द में आराम करना चाहिए। निद्रा लेने से सब तरह के सिरदर्द आराम होते हैं। कब्जियत के कारण होनेवाले सिरदर्द में मामूली जुलाब लेना चाहिए।

(१) हरड़, बहेड़ा, आँवला, चिरायता, हल्दी, नीम की छाल और गिलोय (गुरुच) — इन दवाइयों का काढ़ा करके गुड़ डालकर पीने से पुराना और कठिन सिरदर्द आराम होता है। यदि इस काढ़े के साथ योगराज गुग्गुल का भी सेवन किया जाय, तो बिना किसी सन्देह के सिरदर्द से छुटकारा मिल सकता है। यह पथ्यादि क्वाथ है। परीक्षित है।

(२) शिरःशूलादिवज्र रस -- शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, लौह भस्म, ताम्र भस्म — प्रत्येक ११.६६ ग्राम, शुद्ध गुग्गुल ४६.४ ग्राम, त्रिफला चूर्ण २३.२ ग्राम; कूठ, मुलेठी, पीपल, सोंठ, गोखरू, वायविडंग, दशमूल — ये प्रत्येक ३-३ ग्राम एकत्रित कर दशमूल के काढ़े की भावना दें। घृत के साथ ४८६ मि.ग्रा. की गोली बना लें। बकरी के दूध या शहद के साथ सेवन करने से सब तरह के शिरोरोग आराम होते हैं।

(३) अनन्तमूल, कमल, कूठ और मुलेठी — इन दवाओं को नीबू के रस में पीसकर तथा घी और तेल मिलाकर लेप करने से अर्धकपाली का दर्द और सूर्य के साथ बढ़नेवाला दर्द (सूर्यावर्त) आराम होता है।

(४) मुचकुन्द के फूल को पीसकर माथे पर लेप करने से सिरदर्द आराम होता है।

(५) गोदन्ती हरिताल भस्म ७२९ मि.ग्रा., प्रवाल भस्म २४३ मि.ग्रा. घी-चीनी में मिलाकर प्रातः-सायं खाने से सिरदर्द में लाभ होता है।