आरोग्य-प्रकाशस्वरभंग (आवाज बैठना)

स्वरभंग (आवाज बैठना)

2 मिनट का पाठ

सर्दी, जुकाम, अधिक खाँसी, गले में घाव आदि कारणों से बोलने की शक्ति कम हो जाती है। किसी समय तो रोगी की आवाज इतनी कम हो जाती है कि रोगी के बहुत जोर लगाकर बोलने से भी सुनने वाला बिल्कुल नहीं समझ पाता। बहुत-से मनुष्यों की आवाज जन्म से ही इतनी कम होती है कि वह किसी तरह की दवा से भी ठीक नहीं होती। यदि किसी कारण स्वर नष्ट या खराब हो गया हो तो औषध सेवन से फायदा हो सकता है। गले में कैंसर हो जाने से भी स्वरभंग हो जाता है।

चिकित्सा

(१) रात को बिछावन पर सोते समय १० से २० तक कालीमिर्च और उतने ही बताशे चबाकर सो जाएँ। इससे सर्दी-जुकाम का स्वरभंग ठीक हो जायगा। कालीमिर्च और बताशे खाकर पानी नहीं पीना चाहिए।

(२) वच का टुकड़ा मुँह में रखकर पान की तरह धीरे-धीरे चबाकर उसका रस पेट में जाने दें। इससे आवाज ठीक होगी। परन्तु वच अधिक मात्रा में नहीं खाना चाहिए, अधिक खाने से कै हो जायगी।

(२-क) एलादि बटी के चूसने से स्वरभंग में लाभ होता है।

(३) गोलमिर्च ७, छोटी इलायची ५, मुलेठी ३ ग्राम, कुलिजन १.५ ग्राम और गेहूँ की भूसी ११.६६ ग्राम -- इन पाँचों दवाओं का काढ़ा २९ ग्राम मिश्री डालकर पीने से आवाज खुल जाती है।

(४) वच, कुलिजन, बाकुची और कत्था -- इनको समभाग लेकर पान के रस में घोंटकर चने के बराबर की गोलियाँ बना लें। इन गोलियों के चूसने से आवाज बहुत जल्द ठीक हो जाती है।

(५) सुबह उठते ही २० जौ चबाकर निगल जाएँ। इससे आवाज ठीक हो जायगी।

(६) ब्राह्मी, वच, छोटी हरड़, अडूसे की जड़ की छाल और पीपल -- इन पाँचों दवाओं का चूर्ण २ से ४ ग्राम तक शहद के साथ चाटने से आवाज ठीक होती है।

(७) वासावलेह या ब्राह्मीघृत का सेवन भी आवाज को ठीक करता है। (वासावलेह कास-प्रकरण और ब्राह्मीघृत उन्माद-प्रकरण में देखिए।)

(८) सर्दी-जुकाम की सभी दवाएँ स्वरभंग में लाभ करती हैं।