आरोग्य-प्रकाशपामा (खुजली)

पामा (खुजली)

3 मिनट का पाठ

यह छूत का रोग है। खुजली वाले का कपड़ा पहनने या मवाद लगने से यह रोग तुरन्त हो जाता है। खुजली को पैदा करने वाला एक तरह का कीड़ा होता है, जो सूक्ष्म और कोमल चमड़े के नीचे रहता है। यही कारण है कि पहले-पहल यह रोग हाथ की उँगलियों में होता है फिर चूतड़ों पर प्रकट होता है। पश्चात् शरीर के तमाम भाग में फैल जाता है, पहले छोटी-छोटी फुंसियाँ उठती हैं, जिनमें बहुत खुजलाहट होती है। रात को खुजली का वेग प्रायः अधिक होता है और खाज के बाद जलन होती है।

चिकित्सा

खुजली के रोगी को सर्वप्रथम जुलाब देकर पेट साफ कर देना चाहिए। इससे तुरन्त लाभ मालूम होगा। फिर रक्तशुद्धि की दवा का सेवन और दवा के लगाने से रोग निर्मूल हो जायगा। कारबोलिक साबुन से प्रतिदिन दो बार धोने से भी शीघ्र लाभ होता है। सारिवादि हिम (पृ० १२०), रसादि प्रलेप (पृ० १२३), जीवन्त्यादि मलहम (पृ० १२३) — सि० यो० सं० में देखें।

(१) ताजा अनन्तमूल २९ ग्राम का फाँट पीने से खाज, खुजली, फोड़ा, फुंसी आदि रक्तविकार अच्छे हो जाते हैं।

(२) अनन्तमूल और गोरखमुण्डी का काढ़ा या अर्क पीने से भी खून साफ हो जाता है।

(३) आँवलासार गन्धक ५८.३२ ग्राम और घी ५.८३ ग्राम को लोहे की कड़छुल में डालकर मन्द अंगारों पर रखकर मन्द ताप से तपाएँ। अधिक ताप से गन्धक जल जायगा। एक मिट्टी के बर्तन में ४६७ ग्राम दूध डालकर मुँह पर महीन कपड़ा लपेट दें। मन्द ताप से गन्धक जब जल जैसा हो जाय तब उसे कपड़े पर डाल दें। कपड़े से छनकर गन्धक दूध में जा गिरेगा। इस प्रकार ७ बार या ३ बार करने से गन्धक शुद्ध हो जाता है। इसको ३ से ६ ग्राम तक शहद के साथ चटाने से खुजली निर्मूल हो जायगी। इससे सब तरह के रक्तविकार शान्त होते हैं।

(४) मजीठ, हरड़, बहेड़ा, आँवला, कुटकी, वच, दारूहल्दी, नीम की छाल और गिलोय—इन ९ दवाओं का काढ़ा पीने से रक्तविकार शान्त होता है तथा खुजली निर्मूल हो जाती है।

(५) तुखमलंगा १९.६६ से २९ ग्राम तक खाने से खुजली में फायदा होता है।

(६) आँवलासार गन्धक को महीन पीसकर वैसलीन या घी में मिलाकर मालिश करने से खुजली में तत्काल लाभ होता है।

(७) पामारि चूर्ण -- अशुद्ध गन्धक २३.२ ग्राम, मैनसिल, कालीमिर्च, कबीला और दारूहल्दी—प्रत्येक ११.६६ ग्राम, नीलाथोथा (तूतिया), मुरदाशंख, सुहागा और सिन्दूर—प्रत्येक ५.८३ ग्राम—इन ९ दवाओं का चूर्ण करें। यह 'पामारि चूर्ण' है। इसे सरसों के तेल में मिलाकर खुजली पर मालिश करने से तीन-चार दिन के अन्दर ही खुजली आराम हो जाती है। यह तेज दवा है, इसलिए पहले बहुत कम चूर्ण तैल में मिलाकर मालिश करें। सह्य हो जाय तब अधिक चूर्ण मिलाकर लगाना चाहिए। यह अमीर प्रकृति के लोगों के काम की दवा नहीं है।

(८) मरिचादि तैल -- आगे रक्तविकार में देखें।