अनुक्रमणिका
हल्के रंग वाली प्रविष्टियों का शीर्षक पाठ में पहचाना नहीं जा सका; वे पास के शीर्षक पर ले जाती हैं।
कोई विषय नहीं मिला। कोई और नाम लिखें।
स्वास्थ्य-प्रकरण (आहार-जल-वायु)
स्वास्थ्य-प्रकरण (जल)
स्वास्थ्य-प्रकरण (वायु)
दूसरा उपस्तम्भ (निद्रा)
- निद्रा अर्थात् पूर्ण विश्राम
- नींद से सुख और शान्ति
- नींद से बच्चों का विकास
- नींद से रोग शान्ति
- निद्रा का प्रभाव
- नींद से जख्म भरता है
- नींद के प्रकार
- नींद का उचित रूप
- नींद का समय
- नींद की मात्रा
- अनिद्रा : एक महारोग
- नींद कसे आये ?
- नींद के लिए नशा सेवन ठीक नहीं
- नींद लाने का आयुर्वेदिक उपाय
- अनिद्रा के प्रसार का कारण और उसकी दवा
तीसरा उपस्तम्भ (ब्रह्मचर्य)
ब्रह्मचर्य के बाधक कारण
ब्रह्मचर्य-रक्षा के सरल उपाय
स्वास्थ्य-साधन-१ (कसरत-व्यायाम)
- कसरत-व्यायाम
- कसरत के लाभ
- व्यायाम और भारत वर्ष
- व्यायाम का वैज्ञानिक आधार
- व्यायाम का स्वास्थ्य से सम्बन्ध
- व्यायाम और सुन्दरता
- व्यायाम और पौरुष
- प्रतिकूल परिस्थिति
- छात्रों के लिए ब्रह्मचर्य अत्यावश्यक क्यों ?
- शारीरिक व्यायाम प्रणाली
- कुश्ती व्यायाम
- दण्ड-व्यायाम
- बैठक व्यायाम
- लाठी व्यायाम
- मुद्गर-व्यायाम
- दौड़ने का व्यायाम
- फुटबाल और हाकी का खेल
- कबड्डी
- कृषि-कार्य और बागवानी
- तैरने का व्यायाम
- कुछ अन्य उत्तम व्यायाम
- ड्रिल या कवायद का व्यायाम
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के व्यायाम
स्वास्थ्य-साधन-१ (आसन-व्यायाम)
स्वास्थ्य-साधन-१ (सूर्य-नमस्कार)
स्वास्थ्य-साधन-१ (व्यायामशाला)
स्वास्थ्य-साधन-२ (स्वच्छता-सफाई)
स्वास्थ्य-साधन-२ (व्यक्तिगत स्वच्छता)
स्वास्थ्य-साधन-२ (शारीरिक स्वच्छता)
स्वास्थ्य-साधन-२ (शरीर की बाहरी सफाई)
स्वास्थ्य-साधन-२ (सामूहिक स्वच्छता)
स्वास्थ्य-साधन-३ (सदाचार)
दिनचर्या
रात्रिचर्या
ऋतुचर्या
स्त्री-स्वास्थ्य
रोग-प्रकरण
वायु से फैलने वाले रोग
दूषित जल से फैलने वाले रोग
कीटदंशजन्य-संक्रामक रोग
सम्पर्कजन्य संक्रामक रोग
मैथुन जन्य संक्रामक रोग
आकस्मिक घटनाएँ और प्राथमिक उपचार
चिकित्सा प्रकरण (ज्वर-बुखार)
चिकित्सा प्रकरण (मलेरिया बुखार)
निमोनिया या फुफ्फुसपाक
इन्फ्लुएंजा
सन्निपातज्वर
अन्यान्य ज्वरों के परीक्षित योग
अतिसार, दस्त
प्रवाहिका या डिसेन्ट्री
संग्रहणी
अर्श (बवासीर)
मंदाग्नि (अजीर्ण)
हैजा (कालरा)
कृमि-रोग कीड़े
कामला (पीलिया)
रक्तपित्त
राजयक्ष्मा (तपेदिक)
खाँसी (कास)
श्वास रोग (दमा)
हिक्का (हिचकी)
सर्दी (जुकाम)
स्वरभंग (आवाज बैठना)
वमन (कै)
मूर्च्छा (बेहोशी)
हिस्टीरिया
अनिद्रा-उन्माद-पागलपन-भूतोन्माद
अपस्मार (मृगी) रोग
वातव्याधि
पक्षाघात (लकवा) रोग
गठियावात सन्धिवात और आमवात
शूलरोग (पेट-दर्द)
कोष्ठबद्धता (कब्जियत)
हृद्रोग (छाती का दर्द)
मूत्रस्तम्भ और मूत्रनाश
मूत्रकृच्छ्र (पेशाब की वेदना)
प्रमेह या धातुस्राव, पेशाब में धातु जाना
मधुमेह (पेशाब में चीनी जाना)
प्लीहा (तिल्ली बढ़ना)
यकृत-पीड़ा जिगर-लीवर की बीमारी
शोथ (सूजन)
व्रण-फोड़े-फुंसी और घाव
पामा (खुजली)
दद्रु (दाद-दिनाय)
सफेद कोढ़
रक्तविकार (खूनखराबी)
सूजाक
उपदंश (आतशक)
अम्लपित्त
रसायन-वाजीकरण और पौरुष
कर्णरोग (कान के रोग)
मुखरोग (मुंह के रोग)
नासारोग
सिर दर्द
नेत्र रोग (आंखों की बीमारियाँ)
बालरोग (बच्चों की बीमारी)
चेचक
स्त्री रोग-प्रदर-प्रसूति-आर्त्तव-कष्ट
सूतिका-रोग
मधुमेह पर औषधि प्रयोग
- इतिहास
- साध्यासाध्यता
- उपद्रव
- आधुनिक जगत
- निदान
- परिभाषा
- वंशगत विवरण
- आक्रामक आयु व मधुमेह
- व्याधि की स्थिति के अनुसार-चिकित्सा निर्धारण
- आयुर्वेदिक दवा के प्रति आकर्षण
- सावधानी
- प्रथम श्रेणी में औषधार्थ
- द्वितीय श्रेणी में औषधार्थ
- तृतीय श्रेणी में औषधार्थ
- प्रथम वर्ग में
- प्रकृतितः परीक्षा
- उपद्रव
- विषाक्तता
- सप्तरंगी
- पलाश अर्क
- शिलाजतु
- मामज्जक वटी
- सालसारादि भावित शिलाजितु
द्रव्य शोधन
दवाओं के निर्माण के विषय में आवश्यक जानकारी
तुलनात्मक मान (तौल)
औषधि द्रव्यों के ग्रहण करने में उपयोगी बातें
सांकेतिक परिभाषा
औषधियों के रोगानुसार अनुपान
परिशिष्ट
अ
- अंकुशमुख कृमि
- अंशुघात (लू लगना)
- अग्निकुमार रस
- अग्नितुण्डी वटी
- अग्निमुख चूर्ण
- अग्निवर्द्धक वटी
- अनिद्रा : एक महारोग
- अनिद्रा के प्रसार का कारण और उसकी दवा
- ९-अनियमितता
- अनुपान
- अनुपान
- अनुपान
- अनुपान और उपयोग
- अन्यान्य आसन
- अपतन्त्रकारि बटी
- अफीम का शोधन
- अभया मोदक
- अभयारिष्ट
- अमरसुन्दरी बटी
- अमलतास की चटनी
- अमीबिक प्रवाहिका चिकित्सा
- अमीर रस
- अमृतधारा
- अमृतारिष्ट
- अरविन्दासव
- अरिमेदादि तैल
- अर्क
- अर्क
- अर्ककपूर
- अर्जुनादिष्ट
- अर्थ का योगायोग
- अर्शकुठार
- अवलेह-पाक-मोदक
- अविपत्तिकर चूर्ण
- अशुद्ध हवा
- अशोकघृत
- अशोकारिष्ट
- ३-अश्लील साहित्य
- अश्वगंधादि चूर्ण
- अश्वगंधारिष्ट
- १-अष्टविध मैथुन
- अष्टांगावलेह
आ
- आंख आना
- आंखों की सफाई और सुरक्षा
- आक्रामक अवस्था
- आक्रामक आयु व मधुमेह
- आग से जलना
- आधुनिक जगत
- आधुनिक व्यायामशाला
- आधुनिक शिक्षित और संयम
- आनन्दभैरव रस
- आन्त्रिक सन्निपातज्वर
- आमलक्यावलेह
- आयुकाल का योगायोग
- आयुर्वेदिक दवा
- आयुर्वेदिक दवा के प्रति आकर्षण
- आयुर्वेदीय प्रकाशन
- आराधना
- आरोग्यपंचक
- आरोग्यवर्द्धनी वटी
- आसन-व्यायाम
- आसव-अरिष्ट संधान
इ
ई
उ
ऊ
ऋ
ए
औ
क
- १२-कठिन ब्रह्मचर्य के बिना भावी जीवन दुःखमय
- कण्ठपीयूष
- कनकासव
- कफकर्तरी
- कबड्डी
- करंजवटी
- कर्ण शूल
- कर्णनाद
- कर्पूर रस
- कर्म का योगायोग
- कल्क
- कल्पतरु रस
- कल्याणवलेह
- कषाय (क्वाथ)
- कसरत के लाभ
- कसरत-व्यायाम
- कस्तूरीभैरव रस
- कांकायन गुटिका
- कान का प्रदाह
- कान का बहना
- कामदुधा रस
- कारण
- कारण
- कारण
- कारण
- कारण
- कारण
- कारण
- कारण
- कारण
- ७-कार्य व्यस्तता
- काल का योगायोग
- कीटदंश
- कुचले का चावल
- कुचले का शोधन
- कुचले की गोलियाँ
- कुछ अन्य उत्तम व्यायाम
- कुटजारिष्ट
- कुनाइन की गोलियाँ
- कुमार कल्याण रस
- कुमार्यासव
- कुश्ती व्यायाम
- ७-कुसंगति : बुरों की दोस्ती
- कूष्माण्ड खण्ड
- कृमिकुठार रस
- कृमिघातिनी वटिका
- कृमिमुग्दर रस
- कृषि-कार्य और बागवानी
- केश (बालों) की सफाई
- कैशोर गुग्गुलु
- क्रव्याद रस
- क्रियाकाल का योगायोग
- क्षार तैल
- क्षार निर्माण विधि
- क्षारागद
ख
ग
घ
च
- चतुर्मुख रस
- चन्दनबलालाक्षादि तैल
- चन्दनादिलौह
- चन्दनासव
- चन्द्रप्रभा वटी
- चन्द्रामृत रस
- चन्द्रोदयावर्ति
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्सा
- चिकित्साक्रम
- चित्रकादि गुटिका
- चूर्ण
- चूर्ण
- चेचक से बचने के उपाय
- चोट आना
- च्यवनप्राश (रसायन)
छ
ज
झ
ट
ड
त
द
ध
न
- नगर की सफाई
- नदी-तालाब का जल
- नवायसलोह
- नाक-कान की सफाई
- नाखूनों की सफाई
- नागार्जुनाभ्र रस
- नाड़ी के क्षीण होने पर
- नारायण तैल
- नारिकेलखण्ड पाक
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान
- निदान-चिकित्सा
- निदान-चिकित्सा
- निदान-चिकित्सा
- निद्रा अर्थात् पूर्ण विश्राम
- निद्रा का प्रभाव
- निमोनिया या फुफ्फुसपाक
- निरामिष महामाष तैल
- नींद कसे आये ?
- नींद का उचित रूप
- नींद का समय
- नींद की मात्रा
- नींद के प्रकार
- नींद के लिए नशा सेवन ठीक नहीं
- नींद लाने का आयुर्वेदिक उपाय
- नींद से जख्म भरता है
- नींद से बच्चों का विकास
- नींद से रोग शान्ति
- नींद से सुख और शान्ति
- नृपतिबल्लभ रस
- नेत्रामृत सुरमा
- नोट
प
- पंचतिक्त घृतगुग्गुलु
- पंचामृतपर्पटी
- पटोलादिक्वाथ
- पथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- पथ्यापथ्य
- परिणाम
- परिणाम अवस्था
- परिभाषा
- परिशिष्ट
- पलाश अर्क
- २-पश्चिमोत्तानासन
- पसीना
- १-पादहस्तासन
- पानी का उपयोग
- पामारि चूर्ण
- पारद का शोधन
- पित्तज्वर
- पीने का पानी
- पुटपक्वविषमज्वरान्तक लौह
- पुटपाक
- पुनर्नवादि मण्डूर
- पुष्यानुग चूर्ण
- ४-पूर्ण अवस्था से पहले सम्भोग
- पूर्ण विकसित अवस्था
- पूर्ण विश्राम
- पूर्वसंचित दोष
- पेय जल--एक समस्या
- प्रकाशक का परिचय
- प्रकृतितः परीक्षा
- प्रजनन
- प्रज्ञापराध
- प्रतापलंकेश्वर रस
- प्रतिकूल परिस्थिति
- प्रतिक्रिया-अवस्था
- प्रथम वर्ग में
- प्रथम श्रेणी में औषधार्थ
- प्रथमावस्था
- प्रदरान्तक रस
- प्रदरारि लोह
- प्रभाकर वटी
- प्रमेहमिहिर तैल
- प्रवाहिका (पेचिश)
- प्रहरकाल का योगायोग
- प्राणवायु-प्राप्ति के साधन
- प्राणायाम (श्वास व्यायाम)
- प्रातः घूमना
- प्रातःकाल उठना
- प्लीहारि वटी
फ
ब
- बचने के उपाय
- बच्छनाग का शोधन
- बनाने की विधि
- बसन्तकुसुमाकर रस
- बहरापन
- बाल जीवन बटी
- बालघोर कालघ्न
- बालचातुर्भद्र चूर्ण
- बाहुशाल गुड़
- बिल्व तैल
- बिहारी सौभाग्य वटी
- बुरी आदतें
- बृहतपिप्पली खण्ड
- बृहत् इच्छाभेदी रस
- बृहत् चन्द्रोदय मकरध्वज
- बृहत् पूर्णचन्द्र रस
- बृहत्सर्वज्वरहरलौह
- बृहद्वातचिन्तामणि रस
- बैठक व्यायाम
- बोलबद्ध रस
- ब्रह्मचर्य अर्थात् संयम
- ब्रह्मचर्य एक दिव्य शक्ति है
- ब्रह्मचर्य और महात्मा गाँधी
- ब्रह्मचर्य और विनोबा
- ब्रह्मचर्य के बाधक कारण
- ब्रह्मचर्य-रक्षा के सरल उपाय
- ब्राह्मीघृत
- ब्राह्मीबटी
भ
म
- मंदाग्नि के साधारण लक्षण
- मण्डूर वटक
- मण्डूरभस्म
- मदनानन्द मोदक
- मधुयष्ट्यादि चूर्ण
- मरिचादि गुटिका
- मरिचादि तैल
- मल-त्याग
- मलेरिया
- मलेरिया की रामबाण गोलियाँ
- मलेरिया बुखार
- मलेरिया रोकने की विधि
- मसूरिका (चेचक)
- मस्तिष्क-सन्निपातज्वर
- महाज्वरांकुश रस
- महात्मा-प्रदत्त मलहम
- ५-महान ध्येय
- महायोगराजगुग्गुलु
- महालक्ष्मी विलास रस
- महालक्ष्मीविलास वटी
- महाशुष्कमूलकाद्य तैल
- मांस्वादि क्वाथ
- मात्रा
- मात्रा-अनुपान
- मामज्जक वटी
- मामूली बुखार
- मासिकधर्म
- मुक्तादि बर्टी
- मुद्गर-व्यायाम
- मुहल्ले की सफाई
- मूत्र-त्याग
- मूत्रल कषाय
- मूसलीपाक
- मृगांक रस
- मृतसंजीवनी बटी
- मृत्युञ्जय रस
- मेहमुग्दर वटिका
- मैथुन जन्य संक्रामक रोग
- मैनशिल का शोधन
- मोतिया बिन्दु
य
र
ल
व
- वंशगत विवरण
- वक्तव्य
- वज्रक्षार
- वर्जित स्थान
- वर्धमान पिप्पली
- वर्षाऋतु (बरसात)
- वातगजांकुश
- वायु (हवा)
- वायु के संघटक तत्व
- वासावलेह
- ६-विद्या प्राप्ति एक महान-ध्येय है
- विशेषगुण
- विष तैल
- विषभक्षण
- विषाक्तता
- ८-वीर्य सम्बन्धी ज्ञान का अभाव
- वृहत् गंगाधर चूर्ण
- वृहत् लोकनाथ रस
- व्यक्तिगत स्वच्छता
- व्याधि की स्थिति के अनुसार-चिकित्सा निर्धारण
- व्यायाम और पौरुष
- व्यायाम और भारत वर्ष
- व्यायाम और सुन्दरता
- व्यायाम का वैज्ञानिक आधार
- व्यायाम का स्वास्थ्य से सम्बन्ध
- व्यायाम के नियम
- व्यायाम के विषय में प्रसिद्ध महानुभावों के अनुभव
- व्रणराक्षस तैल
श
- शंख बटी
- शंखद्राव
- १३-शक्ति के खर्च पर नियन्त्रण
- शयन
- शरीर का ताप
- शरीर की बाहरी सफाई
- शरीर की भीतरी सफाई
- शर्बत
- शान्तिवर्धक चूर्ण
- शारीरिक व्यायाम प्रणाली
- शारीरिक स्वच्छता
- शिरःशूलादिवज्र रस
- शिलाजतु
- शिलाजित्वादि वटी
- शिलाजीत का शोधन
- शिवाक्षार पाचन चूर्ण
- शिवामोदक
- शीतऋतु (सरदी)
- शीतल जल पीना
- शीतांग अवस्था
- शीतावस्था
- ६-शीर्षासन
- शुद्ध हवा (प्राणवायु)
- शुष्क सत्व
- शूलवज्रिणी वटी
- शृंगाराभ्र
- ११-शृङ्गार
- शोथारि मण्डूर
- शौच (पाखाना) जाना
- श्रीगोपाल तैल
- श्वास कुठार
- श्वास कुठार रस
- श्वास रोग पर विशेष अनुभव
- श्वास-प्रश्वास
- श्वासचिन्तामणि रस
ष
स
- संक्रामक रोग
- संखिया का तैल
- संखिया का शोधन
- संखिया के फूल
- संग्रहणी की बहुपरीक्षित दवा
- संजीवनी
- संध्याकाल
- संयम आज अधिक आवश्यक है
- संयम की उपेक्षा क्यों ?
- संशमनी बटी
- ४-सदा स्वस्थ रहने की दृढ़कामना
- सदाचार
- सन्निपात भैरव रस
- सन्निपातज्वर
- सप्तपर्ण वटी
- सप्तरंगी
- सप्तामृत लोह
- सम्पर्कजन्य संक्रामक रोग
- सम्यक योग
- सर्वांगसुन्दर रस
- ४-सर्वांगासन
- ५-सह-शिक्षा
- साँप का काटना
- १०-साइकिल की सवारी
- ३-सात्विक भोजन
- ८-सादगी से रहना
- साध्यासाध्यता
- सामुद्रादि चूर्ण
- सामूहिक स्वच्छता
- सारस्वतचूर्ण
- सारिवादि हिम
- सारिवाद्यासव
- सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता
- सालसारादि भावित शिलाजितु
- सावधानी
- सितोपलादि चूर्ण
- सिद्धप्राणेश्वर
- २-सिनेमा
- सुजाक से बचने का उपाय
- सुधाष्टक योग
- सुपारी पाक
- सूतशेखर रस
- सूत्र कृमि
- सूरणमोदक
- सूर्य-नमस्कार
- सूर्य-नमस्कार के विभिन्न आसन
- सेवन विधि
- सोमनाथ रस
- स्त्री संगम के लिए आयुर्वेद में नियम
- स्थानिक और सर्वांगिक भेद
- स्नान करना
- स्मृतिसागर रस
- स्वच्छ वायु
- स्वच्छता (सफाई)
- स्वरस
- स्वर्णपर्पटी
- स्वर्णबसन्तमालती
- स्वर्णराजवंगेश्वर
- स्वल्पाहार (नाश्ता)