वमन (कै)
4 मिनट का पाठ
अधिक भोजन, अजीर्ण, अम्लपित्त, कृमिरोग, यकृत की पीड़ा, स्त्रियों की जरायु की पीड़ा, स्नायुमण्डल का रोग, गर्भधारण, कमजोरी, विष या विष मिली चीजों का उदरस्थ होना, रेल, जहाज, मोटर आदि की सवारी से सफर करना आदि कारणों से पाकस्थली उत्तेजित होकर वमन होता है। कै करने से जब सब पदार्थ पेट से बाहर आ जाता है, तब सूखी कै होने लगती है। सूखी कै से रोगी को अधिक कष्ट होता है, क्योंकि पाकस्थली में आक्षेप होने से बार-बार कै करने की इच्छा होती है, परन्तु कै के साथ कोई वस्तु नहीं आती, बार-बार कष्टमात्र होता रहता है।
चिकित्सा
वमन रोग में केवल वमन बन्द कर देने की दवा देने मात्र से ही कार्य सिद्ध नहीं होता। कारण पर ध्यान रखकर चिकित्सा करने से सफलता मिलती है। विष या विष मिली चीजों के खाने के कारण वमन होता हो तो वमन व दस्त कराएँ। इससे विष बाहर होकर शान्ति मिलेगी। यदि अजीर्ण के कारण वमन होता हो, तो मन्दाग्नि की चिकित्सा करें। इसी तरह अम्लपित्त, कृमि, यकृत् की पीड़ा आदि से वमन होने पर मूल रोग का इलाज करें। मूल रोग अच्छा होने पर कै खुद ही अच्छी हो जायगी। गर्भ के कारण होनेवाला वमन समय पर खुद ही अच्छा हो जाता है। रेल आदि सवारी के कारण होनेवाले वमन में खाने को बहुत कम दें और फलों का सेवन अधिक कराएँ। साधारण कै में नीचे लिखी दवाइयाँ बहुत जल्दी फायदा करती हैं।
(१) अर्क कपूर या अमृतधारा चीनी डालकर देने से प्रायः सब तरह के वमन ठीक हो जाते हैं।
(२) जल के साथ जायफल घिसकर पीने से वमन बन्द हो जाता है।
(३) लौंग ७, छोटी इलायची के छिलके ७ और अदरक ११.६६ ग्राम को जल के साथ खूब महीन पीसकर २३.२ ग्राम मिश्री मिला दें। फिर २३३ ग्राम पानी में मिलाकर गर्म करें, औटाने पर छानकर दूसरे पात्र में रख लें। इस पात्र को जरा-सा गर्म रखें। ५-१० मिनट के अन्तर से एक-एक चम्मच रोगी को पिलाने से सूखी कै तुरन्त अच्छी हो जायगी। वमन में भी फायदा होता है। स्मरण रहे कि रोगी को दिया जानेवाला यह जल निरन्तर गर्म ही रहे, ठंडा न होने पावे। परीक्षित है।
(४) इलायची, लौंग, नागकेशर, बेर की गिरी, धान का लावा (खोई), फूल प्रियंगु, कपूर, सफेद चन्दन और पीपल -- इन सब दवाओं का समभाग लेकर चूर्ण करें। तीन ग्राम की मात्रा में समभाग मिश्री और शहद मिलाकर चाटें। इसका नाम 'एलादि चूर्ण' है। यह वमन की अच्छी दवा है। -- भै० र०
(५) सौंफ, पुदीना और बड़ी इलायची -- तीनों चीजें ११.६६ ग्राम लेकर काढ़ा बना लें। २९ ग्राम मिश्री डालकर पीने से वमन में लाभ होता है।
(६) छोटी इलायची १०, मुनक्का १०, कालीमिर्च १५, लौंग १०, सेंधा नमक ३ ग्राम, अदरक ५ तोला, मिश्री ५ तोला और भुना हुआ जीरा १ तोला -- इन वस्तुओं को महीन कूट करके २३३ ग्राम सौंफ या पुदीना के अर्क में मिलाकर रख दें। कुछ समय के बाद सफेद कपड़े से छानकर बोतल में भर दें। वमन होने पर इस पानी को ११.६६ ग्राम रोगी को पिलाने से कै फौरन बन्द हो जाती है।
(७) बर्फ के टुकड़ों को मुँह में रखकर चूसने से भी वमन बन्द होता है।
(८) सूखा वमन करने वाले रोगी को भरपेट पानी पिला दें। इससे वमन बन्द हो जायगा; क्योंकि वमन में पाकस्थली संकुचित होती रहती है। जल के कारण पेट पूरा भर जाता है, इसलिए पाकस्थली संकुचित नहीं हो सकती। फलतः कै बन्द हो जाती है। किसी समय इस क्रिया से बड़ा चमत्कारपूर्ण फल होता है।
(९) रसादि बटी (ज्वराधिकार की) पित्तजन्य वमन में लाभ करती है।
(१०) कपूरकचरी का महीन चूर्ण करके चन्दनादि अर्क से वटी बनाकर देना भी लाभदायक है।
(११) लाजामण्ड -- सि० यो० सं० पेज ४८ देखें।
पथ्यापथ्य
जब तक रोगी को वमन होता रहे, तब तक ठंडे पानी के सिवा कुछ न देना चाहिए। एक गिलास पानी में ५८.३२ ग्राम चीनी और नीबू का रस मिलाकर पीना उत्तम है। यदि किसी खास रोग के कारण कै होती हो, तो उसी रोग का पथ्यापथ्य सेवन करना उचित है। पाकस्थली को ठीक रखने के लिए यह आवश्यक है कि भोजन में पेय पदार्थ ही हों। रोटी, दाल, भात, पूड़ी, कचौड़ी, मिठाई आदि चबाने योग्य वस्तुएँ लाभदायक नहीं हैं। दूध, साबूदाना, खोई, दलिया, खिचड़ी आदि पतली वस्तुएँ खाना लाभदायक है।