आरोग्य-प्रकाशहिक्का (हिचकी)

हिक्का (हिचकी)

2 मिनट का पाठ

लाल मिर्च, गरम मसाला आदि तीक्ष्ण पदार्थों के खाने, उत्तेजक दवा अधिक मात्रा में खाने, अधिक कुनैन खाने और अम्लपित्त रोगों के कारण हिचकी पैदा हो जाती है। हिचकी किसी तरह भी उत्पन्न हो, उसमें पाकस्थली का उत्तेजित होना निश्चित है। बहुत-से रोगों के साथ हिचकी अधिक देखने में आती है तथा स्वतन्त्र, बिना किसी रोग के साथ भी हो सकती है। हिचकी मामूली और भयंकर दोनों तरह की होती है। मामूली हिचकी प्रायः बिना किसी तरह की दवा से अपने-आप आराम हो जाती है; परन्तु भयंकर हिचकी बहुत कष्ट देती है, यहाँ तक कि रोगी की मृत्यु हो जाती है।

चिकित्सा

हिचकी के रोगी को गर्म दूध या गर्म जल के अलावा खाने को कुछ भी मत दें। इससे पाकस्थली की उत्तेजना शान्त होकर हिचकी भी अपने-आप शान्त हो जायगी। दूध या जल भी अधिक गर्म न होना चाहिए। हिचकी के रोगी को पेट भर न खाना चाहिए। आरम्भ में जुलाब देकर दशमूल वगैरह वातनाशक औषधियाँ सेवन कराएँ।

(१) मोर (मयूर) के पंख के चाँदों को जलाकर भस्म कर लें। यह भस्म २४३ मि.ग्रा. और पीपल का चूर्ण १२१.५ मि.ग्रा. शहद में मिलाकर चाटने से हिचकी बन्द हो जायगी।

(२) बिजौरा नीबू का रस २३.२ ग्राम में तीन ग्राम नमक मिलाकर पिलाने से हिचकी शान्त होती है।

(३) जल के साथ सोंठ घिसकर सूँघने से हिचकी बन्द होती है।

(४) आक के फूल के चावलों को तेल से चिकना करके निगल जाने से हिचकी बन्द होती है।

(५) साँस रोककर प्राणायाम करने से हिचकी में लाभ होता है।

(६) हिचकीवाले रोगी का ध्यान निश्चित रूप से एक ओर जाने से भी हिचकी तुरन्त बन्द हो जाती है।

(७) पोटैशियम परमैंगनेट ६१ मि.ग्रा. को जल में घोलकर सूँघने से अत्यधिक छींकें आने लगती हैं, जिससे छींक की ओर रोगी का ध्यान चला जाता है और हिचकी बन्द हो जाती है।

(८) सोंठ, पीपल, आँवला और मिश्री -- इन चार दवाओं का महीन चूर्ण शहद के साथ तीन ग्राम चाटने से हिचकी में फायदा होता है।

(९) हालिम ११.६६ ग्राम को साबूदाना की तरह पकाकर खाएँ; इससे हिचकी बन्द होगी।

नोट -- जो दवाएँ श्वास-प्रकरण में लिखी गई हैं, वे सब हिचकी रोग में भी व्यवहार की जाती हैं।