आरोग्य-प्रकाशसर्दी (जुकाम)

सर्दी (जुकाम)

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कारण

सर्दी अथवा जुकाम होने के दो कारण हैं-- पूर्व संचित दोष तथा तात्कालिक अपथ्य।

पूर्व संचित दोष

श्वास, पेट की बीमारी (कब्जियत), टॉन्सिल का बढ़ना, नासा रोग, कमजोरी आदि कारणों से रोगी के सावधान रहते हुए भी बार-बार जुकाम होता रहता है।

तात्कालिक अपथ्य

वर्षा के जल में भीगना, ठण्ड लगना, कड़ी धूप में घूमना, रात्रि जागरण, दिवा स्वप्न, अजीर्ण, एकाएक पसीना बन्द करना आदि कारणों से तत्काल जुकाम हो जाता है। कस्बे या शहरों में आजकल धुआँ तथा धूल-मिश्रित वायु में अधिक रहना पड़ता है, इसलिए स्वच्छ वायु के अभाव में यह रोग उत्पन्न होता है और देहात की अपेक्षा नगर के बाशिन्दे इस रोग से विशेष पीड़ित होते हैं।

इन पूर्व संचित दोषों और तात्कालिक अपथ्यों के कारण नाक और श्वास नलिका के कुछ हिस्सों की श्लैष्मिक कला का प्रदाह होकर जुकाम उत्पन्न हो जाता है। नासा और गले की श्लैष्मिक कला में शोथ होने से सर्दी और ज्वर दोनों हो जाते हैं। जुकाम होने पर बेचैनी, सम्पूर्ण शरीर में दर्द, अंगड़ाइयों का आना, नाक और आँखों से जल बहना, छींक, सिर-दर्द, सिर का भारीपन, खुश्क खाँसी, स्वरभंग, अरुचि आदि विकार उत्पन्न हो जाते हैं। अगर समय पर उचित उपचार न हो, तो जुकाम से अनेक प्रकार के रोग पैदा हो जाते हैं। इन रोगों में मन्द ज्वर, अरुचि, कफ, खाँसी, बलगम गिरना, नाक से दुर्गन्ध आना तथा दुर्गन्धयुक्त स्राव का होना, सिर दर्द आदि प्रधान हैं। जुकाम एक संक्रामक रोग है, इसलिए रोगी के नासास्राव से दूषित वस्तु तथा उसके श्वास के सम्पर्क में रहनेवालों को भी यह रोग हो जाता है।

चिकित्सा

रोग के मूल कारण पर ध्यान रखकर ही चिकित्सा करनी चाहिए। यदि श्वास, पेट की बीमारी, टॉन्सिल-वृद्धि, नासा रोग और कमजोरी के कारण जुकाम हुआ हो, तो जुकाम की चिकित्सा करते हुए उस मूल रोग की चिकित्सा करनी चाहिए; क्योंकि जब तक मूल रोग रहेगा, जुकाम की दवा से कोई लाभ नहीं होगा। तात्कालिक कारणों से होने वाले जुकाम में गर्म जल का सेवन और उपवास सबसे अच्छा इलाज है। अगर रोगी को कब्जियत हो, तो साधारण दस्तावर दवा देकर पेट साफ कर देना चाहिए। साधारणतया जिस रोज जुकाम लगता है, उसके दूसरे रोज नाक अधिक बहकर तीसरे दिन पककर अपने-आप ठीक हो जाता है। जुकाम की आरम्भिक अवस्था में ही गर्म और खुश्क दवा लेने से जुकाम बिगड़ जाता है। फलतः कई रोग पैदा हो जाते हैं। अगर दवा लेने की जरूरत महसूस हो, तो निम्नलिखित दवा लेनी चाहिए :--

(१) २३.२ ग्राम खूबकलाँ को ४६६.५ ग्राम पानी में औटाकर दो छटाँक शेष रहने पर छान लें। फिर मिश्री मिलाकर पी जाना चाहिए।

(२) उन्नाब ७ अदद, लिसोड़ा ७ अदद, बनफ्शा, गाजवाँ, मुलेठी, खसखस और सौंफ -- प्रत्येक ६-६ ग्राम, तुरंजबीन १९.६६ ग्राम -- सबको २९ ग्राम लेकर २३३.२ ग्राम पानी में काढ़ा करें। ५८ ग्राम शेष रहने पर पीना चाहिए। मिश्री के साथ मिलाकर आधा सबेरे और आधा शाम को पीना चाहिए। यह जुकाम में तरी और तुरन्त फायदा पहुँचानेवाली श्रेष्ठ औषधि है।

गोजिह्वादि क्वाथ -- सि० यो० सं० पेज नं० १६ देखें।

(३) सोंठ, कालीमिर्च, पीपल, अम्लवेतस, चव्य, तालीसपत्र, चित्रकमूल, सफेद जीरा और इमली -- प्रत्येक १२.६६ ग्राम, दालचीनी, छोटी इलायची और तेजपत्र -- तीनों मिलाकर ९ ग्राम। इन सबको कूटकर कपड़छान करना चाहिए। फिर २३३ ग्राम गुड़ मिलाकर छोटे बेर के बराबर गोली बना लें। दिन भर में ४-५ गोली चूसने से जुकाम और खाँसी में बहुत फायदा होता है। इस योग का नाम 'व्योषादि वटी' है। -- शा० ध०

(४) चन्द्रामृत रस को तालमिश्री या केवल मिश्री के साथ चूसने से सर्दी-जुकाम और खाँसी में फायदा होता है।

(५) तुलसी के पत्ते के एक पाव स्वरस में ७०० ग्राम मिश्री मिला चाशनी बनाकर बोतल में भर लें। इस शर्बत में से २३.२ ग्राम दिन में तीन-चार बार लेना चाहिए। इससे जुकाम-कास में बहुत फायदा होता है।

(६) चित्रकमूल, आँवला, गिलोय और दशमूल -- प्रत्येक १.२७ किलो लेकर जौकुट कर लें। फिर ४६.६५ किलो जल में डालकर उसका काढ़ा बनावें और चतुर्थांश शेष रहने पर छान लें। उस काढ़े को फिर औटाएँ। जब कुछ गाढ़ा हो जाय, तब ९३३ ग्राम बड़ी हरड़ का चूर्ण तथा ९३३ ग्राम गुड़ मिलाकर कुछ देर आग पर रहने दें। उतारने के बाद सोंठ, मिर्च, पीपल, छोटी इलायची, तेजपत्ता, दालचीनी और जवाखार -- प्रत्येक १४.६ ग्राम महीन चूर्ण करके मिलाएँ। ठंडा होने पर एक पाव शहद मिलाकर रख दें। इसका नाम "चित्रक हरीतकी" है। यह साधारण और बिगड़े हुए जुकाम की सर्वश्रेष्ठ दवा है। १२.६६ ग्राम दूध या गर्म जल से दोनों समय लेना चाहिए।

(७) बिगड़े और पुराने जुकाम के लिए स्वर्णघटित लक्ष्मीविलास रस बहुत अच्छी दवा है। इसमें २४३ मि.ग्रा. गोदन्ती भस्म मिलाकर लिया जाय, तो और भी शीघ्र लाभ होता है।

(८) कश्मीरी पाठा और उस्तखद्दूस ११.६६ ग्राम, जटामांसी, गुलबनफ्शा ५.८ ग्राम -- इन चारों दवाओं का खूब महीन चूर्ण कर लेना चाहिए। इसको सूँघनी (नस्य) की तरह सूँघने से जुकाम में फायदा होता है।

(९) लक्ष्मीविलास रस पान के रस और मधु के साथ सुबह-शाम लेना चाहिए।

(१०) षड्बिन्दु तैल ५-७ बूँद सूँघने से सर्दी-जुकाम में बहुत फायदा होता है।

(११) तालीसादि चूर्ण -- सि० यो० सं० पेज ७७ देखें।