खाज-खुजली
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खाज खुजली ऐसे चर्म रोग हैं जो संक्रमण से एक दूसरे को लग जाते हैं । अन्य चर्मरोगों की भांति यह भी विशेषकर चमड़ी की सफाई में लापरवाही करने से होते हैं । चमड़ी पर जमा मल खाज-खुजली के कीटाणुओं का अच्छा ख़ासा आश्रय स्थल होता है । जो लोग नित्य नियम से नहाते नहीं है, उन्हें यह रोग निश्चित होता है ।
प्रायः लोग अंगुलियों की संधियों और पौरुओं की सिकुड़न को भली-भाँति साफ नहीं करते । मलद्वार और मूत्रद्वार के मध्यवर्ती स्थल की सफाई पर भी विशेष ध्यान नहीं दिया जाता । अंगुलियों की संधियों और पोरुओं की सिकोड़ों में जमे मैल की तहों में खुजली के कीटाणु संक्रमण करते हैं । इसी कारण खुजली का आरंभ अंगुलियों की संधियों और विटप प्रदेश में फुंसिया उठने से ही होता है । फिर धीरे-धीरे रोग का विष शरीर के अन्य भागों में भी फैल जाता है ।
खाज-खुजली का एक बड़ा सा कारण गीले वस्त्रों का उपयोग । जब लोग नदी-तालाब पर नहाते हैं, तो पहने हुए वस्त्र के ही आधे भाग को निचोड़कर पहिन लेते हैं और उसी अवस्था में घर तक जाते हैं । गांवों में स्त्रियाँ तो बहुधा स्नानोपरान्त गीले वस्त्र पहन कर ही लौटती हैं । गीले वस्त्रों से चमड़ी में खुजलाहट होती है और नाखूनों से खुजलाने के कारण बदन में पीबदार फुंसियाँ हो जाती हैं ।
खुजली का संक्रमण एक से दूसरे व्यक्ति में स्पर्श से ही हो जाता है। रोगी के कपड़े पहनने या उसके विस्तर का उपयोग करने अथवा उसके साथ लेटने-वाले को निश्चित रूप से खुजली का रोग लग जाया करता है ।
इसी प्रकार से एक्जिमा (छाजन) और दाद रोग भी स्पर्श के सम्पर्क से फैलते हैं । इसका प्रमुख कारण भी शरीर की भली-भांति सफाई न करना है । सभी प्रकार के चर्म रोगों से रक्षा का सर्वोपरि साधन यह है कि शरीर की नित्य खूब सफाई करते रहें । स्नान में साबुन का प्रयोग न करें क्योंकि साबुन त्वचा की स्वाभाविक स्निग्धता को सोखता है और चमड़ी में रूखापन पैदा करता है । स्नान के समय मोटे खुर-दुरे खद्दर के गीले कपड़े से रगड़-रगड़ कर बदन की सफाई करना बहुत उपयोगी होता है । एक्जीमा के रोगी को साबुन और तेल का व्यवहार नहीं करना चाहिए, विशेष करके पीड़ित स्थान को तो तेल और साबुन से बचाना ही चाहिये ।