कीट-दंश
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बहुधा वरें (ततइया) हड्डा, बिच्छू आदि के डंक मारने की आकस्मिक घटनायें होती हैं, जिनमें तत्काल प्राथमिक उपचार न होने से कष्ट होता है । जब कोई ऐसा कीड़ा काटे तो सबसे पहला काम यह करना चाहिए कि दंश स्थान को सुई, चाकू या सूआ (सूजा) से कुरेद कर डंक बाहर निकालें । फिर उस पर तम्बाखू या प्याज कुचल कर बाँध दें । असली अर्क कपूर या थोड़ा-सा कार्बोलिक एसिड लगा देने से शीघ्र लाभ होता है, परन्तु कार्बोलिक एसिड बहुत सावधानी से लगाना चाहिए, क्योंकि अधिक लग जाने से फफोले पड़ जाने की संभावना रहती है ।
बिच्छू के डंक स्थान पर डंक निकालने के बाद तारपीन का तेल या पत्थर का कोयला घिस कर लगाने से भी काफी लाभ होता है । बिच्छू के दंशस्थान से जहाँ तक वेदना का अनुभव होता हो उस स्थान बांधकर ताजा पानी की धारा डालते रहें और गुड़ का शरबत पिला दें ।
कान खजूरे के काटने पर गूलर के पत्ते पीसकर लगाने से लाभ होता है । पागल कुत्ता या स्यार काट ले तो शीघ्र ही चेष्टापूर्वक उपचार और चिकित्सा करानी चाहिए । सबसे पहले यह पता लगा लेना चाहिए कि काटने वाला कुत्ता पागल तो नहीं है । पागल कुत्ते के काटने से कुछ दिनों बाद शरीर में भीषण जहर फैलता है । इसलिए कुत्ते के काटे क्षतों (घावों) को तत्काल ही टिचर, स्प्रिट या पेट्रोल से धो डालना चाहिए । और अस्पताल जाकर इन्जेक्शन लगवा लेना चाहिए ।
पागल कुत्ते के काटने से उत्पन्न रोग संक्रामक होता है । यदि कुत्ता-दंश से दूषित व्यक्ति किसी दूसरे स्वस्थ व्यक्ति को काट ले या नोंच ले तो उसमें भी वैसे ही रोग का संक्रमण हो जाता है । उसके शरीर में भी जहर फैल जाता है ।